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किस दर दुआ से दीदार करूँ मैं

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Picture courtesy of  Maltz Evans किस दर दुआ से दीदार करूँ मैं, हर दरवाजे पर दोजख का पैगाम लिखा है। जिन्दगी में लगी आग की दास्तां किसे सुनाऊं, आज सागर में भी धुआँ का इक कोहराम दिखा है। कत्ल आम की दास्ताँ का आलम हमसे न पूछो यारों, इनसानियत पर भी तो ये इल्जाम लगा है। इनसाफ़ भी तो खुद से इस कदर जुदा हुआ, मुझ पर ही मेरे कत्ल का इल्जाम लग गया। इनसानियत की कब्र पर दावत की शाम है। इस शाम में बटी हैवानियत की जाम है। मासूमों के लाश पर बनते है आज महल यहाँ। खुदा की खुदाई पर भी इल्जाम लगा है।

जब रोशन हो जहाँ

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Picture courtesy of  Shan Sheehan जब रोशन हो जहाँ , तो हजारों परवाने मिल जाते है।                  छोटी-छोटी बातों के फसाने बन जाते है। पर जब दौर अंधेरे का आता है , खुद का साया भी साथ छोर जाता है। हर चीख अनसुनी सी रह जाती है , जब तकदीर की कमी रह जाती है। जब राहें रोशन हो तो मुसाफिर हजा रों मिलेंगे , खरोंच भी लग जाए तो सहारे हजारों मिलेंगे। पर वीरान राहों पर ऐसी तकदीर नहीं होती , जख्म हजारों हैं , पर उनकी कोई तस्वीर नहीं होती। Picture courtesy of  peter jackson जिन्दगी का ये कैसा दोहरा स्वरूप है ? आबाद जंगलों को हरियाली मिलती बेहिसाब है । पर हर रेगिस्तान का निर्जन बन जाता ख्वाब है। जिन्दगी के खेल भी अजीब हैं । जहाँ जीवन है , वहाँ दुनिया नहीं। जहाँ दुनिया है , वहाँ जीवन नहीं। kumar vishwas at his best awesome poetry at BIT  Video taken from YouTube channel Crazy Harsh

उड़ जा रे

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Picture courtesy of  Susanne Nilsson छाया जब धुंध घनेरा हो, पहचान पर तेरे पहरा हो, नभ में अंकुश चहुँओर दिखे, जब सन्नाटे सब ओर बटे।             तू आहट अपनी सुनाएगा,             नभ का पंकज खील जायेगा।                        तू पंख लगा कर  उड़  जा रे।             मंजिल से अपने जुड़ जा रे। पुलकित पावन परिभाषा तू, नव युग की रोशन आशा तू। अम्बर के आनन को छु कर, हर ज़र्रे को दिखला जा तू।             घनघोर अँधेरा छाया हो,             ज़र्रा-ज़र्रा घबराया हो।             तू रोशनी का संदेश सुना,             हर दीपक को तू जला जा रे।             तू पंख लगा कर उड़ जा रे,                        म...

तू मंज़िल मेरी, तू किनारा मेरा है

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Picture courtesy of  JHONNY LAI काफ़िला वक़्त का थम सा गया है। हसरतों का नशा अब कुछ चढ़ सा गया है। जब से ए हमसफ़र तू मिला है मुझे, हर लम्हा अब थोड़ा ठहर सा गया है। हर हकीकत की तस्वीर तुमसे जुड़ी है। हर घड़ी वक़्त का इक इशारा लगा है। तुझी से शुरु अब कहानी मेरी है, तुझी पर खत्म अब फ़साना मेरा है। हूँ अगर नाव मैं तो तू किश्ती है मेरी। हूँ अगर ज़िन्दगी तो तू धड़कन मेरा है। उस खुदा की खुदाई की तू रोशनी है। तू मंज़िल मेरी, तू किनारा मेरा है। Kumar Vishwas awesome lines: Koi deewana kahta hai

यादें

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Picture courtesy of  wolfgangfoto यादें जिंदा तस्वीर है। अतीत के पन्नों पर खिंची शरारत की लकीर है।  यादें जिंदा तस्वीर है। जब यादों की धुन चुपके से कानों में आती है, भूले बिसरे गीतों के सरगम सी सुना जाती है। हर डर धुंधला सा हो जाता है, जब जीवन का समां यादों में जगमगाता है। अनगिनत लम्हों को बांधे इक प्यारी सी ज़ंजीर है, यादें जिंदा तस्वीर है।

आज आज़ादी की ओर चला हूँ मैं।

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Picture courtesy of  josefgrunig अपनी बंदिशों को झकझोर चला हूँ मैं, आज आज़ादी की ओर चला हूँ मैं। इक दौर था जब अँधेरों का घना साया था, डरा सहमा मैं मन ही मन घबराया था, दबें थे हर इक अल्फाज मन के किसी कोने में, उन अँधेरों से मुंह मोड़ चला हूँ मैं, आज आज़ादी की ओर चला हूँ मैं।       सोचा था की कभी तो वो मुकाम मुमकिन होगा,       हर कश्ती को उसका साहिल तो हासिल होगा।       पर आज जो नज़ारे यूं बदले है,       हर इनसान के ख़ुद पर जो पहरे हैं,       इनसानियत के बीच जो पनपी खाई है,       अब हर उम्मीद से मुंह  मोड़  चला हूँ मैं।       हर बंदिशों से नाता छोड़ चला हूँ मैं।       आज आज़ादी की ओर चला हूँ मैं।