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किस दर दुआ से दीदार करूँ मैं

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Picture courtesy of  Maltz Evans किस दर दुआ से दीदार करूँ मैं, हर दरवाजे पर दोजख का पैगाम लिखा है। जिन्दगी में लगी आग की दास्तां किसे सुनाऊं, आज सागर में भी धुआँ का इक कोहराम दिखा है। कत्ल आम की दास्ताँ का आलम हमसे न पूछो यारों, इनसानियत पर भी तो ये इल्जाम लगा है। इनसाफ़ भी तो खुद से इस कदर जुदा हुआ, मुझ पर ही मेरे कत्ल का इल्जाम लग गया। इनसानियत की कब्र पर दावत की शाम है। इस शाम में बटी हैवानियत की जाम है। मासूमों के लाश पर बनते है आज महल यहाँ। खुदा की खुदाई पर भी इल्जाम लगा है।

तू मंज़िल मेरी, तू किनारा मेरा है

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Picture courtesy of  JHONNY LAI काफ़िला वक़्त का थम सा गया है। हसरतों का नशा अब कुछ चढ़ सा गया है। जब से ए हमसफ़र तू मिला है मुझे, हर लम्हा अब थोड़ा ठहर सा गया है। हर हकीकत की तस्वीर तुमसे जुड़ी है। हर घड़ी वक़्त का इक इशारा लगा है। तुझी से शुरु अब कहानी मेरी है, तुझी पर खत्म अब फ़साना मेरा है। हूँ अगर नाव मैं तो तू किश्ती है मेरी। हूँ अगर ज़िन्दगी तो तू धड़कन मेरा है। उस खुदा की खुदाई की तू रोशनी है। तू मंज़िल मेरी, तू किनारा मेरा है। Kumar Vishwas awesome lines: Koi deewana kahta hai

आज फिर घनघोर घटा घिर आई है।

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Picture courtesy of  bc104 आज फिर घनघोर घटा घिर आई है। उदास अम्बर पर अनजान ख़ुशी सी छाई है। बेहिसाब बादल जो उमरे मन के मौसम में, आई दस्तक सावन की मन के उपवन में। ख़ामोश ज़िन्दगी में ये किसकी आहट आई है, आज फिर घनघोर घटा घिर आई है। कल तक जो झुलसी थी उपवन की कलिया, बिछड़े थे ख्वाबों से रंगीन रंगरलियाँ। गूंगे हर फ़साने पर खामोशी का पहरा था। उबलती ज़िन्दगी का घाव कुछ गहरा था। फिर अंतरमन में ये किसकी किलोल छाई है, आज फिर घनघोर घटा घिर आई है। कल तक जो बैठा था, मैं यूं ही गुपचुप सा। तपता सा, जलता सा, मुरझा सा, सहमा सा। खोये हर फ़साने थे, डूबे हर तराने थे, फिर सुलगते इस धूप पर किसकी परछाई सी छाई है। आज फिर घनघोर घटा घिर आई है।