Posts

Showing posts with the label yaaden

किस दर दुआ से दीदार करूँ मैं

Image
Picture courtesy of  Maltz Evans किस दर दुआ से दीदार करूँ मैं, हर दरवाजे पर दोजख का पैगाम लिखा है। जिन्दगी में लगी आग की दास्तां किसे सुनाऊं, आज सागर में भी धुआँ का इक कोहराम दिखा है। कत्ल आम की दास्ताँ का आलम हमसे न पूछो यारों, इनसानियत पर भी तो ये इल्जाम लगा है। इनसाफ़ भी तो खुद से इस कदर जुदा हुआ, मुझ पर ही मेरे कत्ल का इल्जाम लग गया। इनसानियत की कब्र पर दावत की शाम है। इस शाम में बटी हैवानियत की जाम है। मासूमों के लाश पर बनते है आज महल यहाँ। खुदा की खुदाई पर भी इल्जाम लगा है।

यादें

Image
Picture courtesy of  wolfgangfoto यादें जिंदा तस्वीर है। अतीत के पन्नों पर खिंची शरारत की लकीर है।  यादें जिंदा तस्वीर है। जब यादों की धुन चुपके से कानों में आती है, भूले बिसरे गीतों के सरगम सी सुना जाती है। हर डर धुंधला सा हो जाता है, जब जीवन का समां यादों में जगमगाता है। अनगिनत लम्हों को बांधे इक प्यारी सी ज़ंजीर है, यादें जिंदा तस्वीर है।